Structure and type of entry AACR – 2 in Hindi

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AACR – 2 के अनुसार संलेख/प्रविष्टि के प्रकार एवं सूचना(Structure and type of entry)

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  • मुख्य प्रविष्टि (Main Entry)

 

  1. क्रमांक संख्या अनुच्छेद (Call Number Section) – यह अनुच्छेद प्रविष्टि का प्रथम भाग होता है। इसमें क्रमांक [ वर्गांक (Class Number)+ ग्रंथांक (Book Number)+संग्रहांक(Collection Number)]लिखा जाता है  हाशिये में एक अक्षर की जगह छोड़कर तृतीय काल्पनिक पंक्ति पर वर्गांक (Class Number) तथा अग्र रेखा(Leading Line) पर ग्रंथांक (Book Number)अंकित किया जाता है। अगर संग्रहांक(Collection Number)  भी हो तो उसे द्वितीय काल्पनिक रेखा पर अंकित किया जाता है
  2. शीर्षक अनुच्छेद (Heading Section) –  यह प्रविष्टि का दूसरा अनुच्छेद है यह अनुच्छेद अग्र रेखा की पंक्ति के बाद वाली पंक्ति पर द्वितीय शीर्ष  से प्रारंभ होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर अनुवर्ती पंक्तियां प्रथम शीर्ष से प्रारंभ होती है । साधारणतया इस अनुच्छेद में लेखक की सूचना अंकित की जाती है। लेखक की अनुपस्थिति में संहिता के नियम अनुसार सहकारक अथवा टाइटल को अंकित किया जाता है। इस अनुच्छेद में पहले प्रविष्टि पद (Entry Element), गौण पद (Secondary Element), व्यष्टि कारक(Individualising Element) अंकित किया जाता है।
  • प्रविष्टि पद (Entry Element) – इसके अंतर्गत सबसे पहले लेखक के कुल नाम को लिखा जाता है।उसके बाद में चिह्न के रूप में कोमा( , ) का प्रयोग करते हैं।
  • गौण पद (Secondary Element) – प्रविष्टि पद (Entry Element) के बाद लेखक का व्यक्तिगत नाम लिखा जाता है उसके बाद में चिह्न के रूप में फिर से कोमा( , ) का प्रयोग करते हैं।
  • व्यष्टिकारक (Individualising Element) – गौण पद (Secondary Element) के बाद चिह्न के रूप में फिर से कोमा( , ) लगाकर यदि लेखक के जन्म वर्ष  तथा उसके पश्चात योजक चिन्ह के रूप में हाइफन (-) लगाकर मृत्यु वर्ष लिखा जाता है उसके बाद फुल स्टॉप (.) लगाया जाता है।अगर लेखक की मृत्यु नहीं हुई है तो सिर्फ हाइफन (-) लगा कर छोड़ दिया जाता है।

जैसे : Sharma, Surender, 1946-2017.

  1. आख्या(टाइटल) एवं दायित्व कथन अनुच्छेद (Title and statement of responsibility section) –  इस अनुच्छेद में आख्या(टाइटल), उपआख्या,समांतरआख्या, उत्तरदायित्व विवरण,  सहकारक, संस्करण (एडिशन), प्रकाशनादि नियमों के अनुसार दर्शाए जाते हैं। इस अनुच्छेद को शीर्षक अनुच्छेद की अगले लाइन के द्वितीय शीर्ष से प्रारंभ होता है।संस्करण (एडिशन) कि पूर्व में (. -) चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे youth growth/by Manjeet Bhadu. – 2nd ed. अगर रिवाइज्ड एडिशन है तो youth growth/by Manjeet Bhadu. – 2nd rev. ed.

इस अनुच्छेद में  निम्नलिखित तीन प्रकार के टाइटल का उल्लेख किया जाता है:

  • मुख्य आख्या (Main Title) – इसमें बुक के मुख्य आख्या का वर्णन करते हैं
  • समानांतर आख्या (Parallel Title) – इसमें मुख्य आख्या का दूसरी भाषा में अनुवाद होता है। मुख्य आख्या के बाद बराबर(=) का निशान लगा कर समांतर आंख्या का उल्लेख उसी भाषा में किया जाता है किस भाषा में वह पुस्तक में दर्शाया है।  जैसे Introduction to Public Library = सार्वजनिक पुस्तकालय परिचय
  • उपआख्या (Sub Titile) – इसमें मुख्य आख्या (Main Title)/समानांतर आख्या (Parallel Title) के बाद कोलन (:) का प्रयोग किया जाता है
  1. भौतिक विवरण और ग्रंथ माला अनुच्छेद (Physical Description and Series Section) –  आख्या(टाइटल) एवं दायित्व कथन अनुच्छेद की समाप्ति के बाद अगली पंक्ति पर द्वितीय उर्ध्व रेखा(second Indentation)  से यह अनुच्छेद प्रारंभ होता है। इसमें मुख्य तौर पर 3 तत्वों का उल्लेख मिलता है:-
  • पृष्ठांकन(Pagination) – इस भाग में सबसे पहले पृष्ठांकन की सूचना दी जाती है। इसमें प्रारंभिक पृष्ठ का उल्लेख  समाल(लघु) रोमन में  तथा मुख्य पृष्ठ की जानकारी इंडो अरेबिक अंक में दी जाती है। जैसे: xii,450p.  (12 प्रारंभिक पृष्ठ और 450 मुख्यपृष्ठ)
  • चित्रित सामग्री(Illustrative matter) –   इस भाग के अंदर यदि पुस्तक में चित्र का वर्णन किया है तो कोलन (:) लगाकर ill का प्रयोग करते हैं।
  • आकार(Size) – पृष्ठांकन(Pagination) और चित्रित सामग्री(Illustrative matter) के बाद साइज के लिए  सेमी कोलन (;) का प्रयोग किया जाता है। बुक की ऊंचाई को सेंटीमीटर में मापते हैं अगर ऊंचाई मिलीमीटर में दी गई है तो उसे सेंटीमीटर के अगले अंक में  पूर्ण के लिखा जाता है। जैसे 20.7 सेंटीमीटर को ;21 cm लिखेंगे।

Example – xii,450p.:6ill;21 cm

ग्रंथ माला अनुच्छेद (Series Section) के पूर्व में (. -) चिन्ह का प्रयोग किया जाता है उसके बाद ब्रैकेट में ग्रंथमाला का विवरण दिया जाता है। जैसे ग्रंथ माला- Medical Progress series no. 5 को  xii,450p.:6ill;21 cm. – (Medical Progress series;no.5) लिखा जाता है।

  1.  टिप्पणी अनुच्छेद (Note Section) – नियम 178 व 278 के अनुसार विभिन्न प्रकार की टिप्पणियों को इस अनुच्छेद में क्रमवार अंकित किया जाता है। इस अनुच्छेद में एक से अधिक प्रकार की टिप्पणियों को दर्शाना हो तो प्रत्येक टिप्पणी को द्वितीय शीर्ष से प्रारंभ करते हुए लिखा जाता है अनुवर्ती पंक्तियां प्रथम शीर्ष से प्रारंभ होती है।
  2. अंतर्राष्ट्रीय मानक बुक संख्या (International Standard Book Number) – टिप्पणी अनुच्छेद की समाप्ति के बाद अगली पंक्ति की पर द्वितीय उर्ध्व रेखा(second Indentation)से अंतर्राष्ट्रीय मानक ग्रंथ संख्या को अंकित किया जाता है। इस अनुच्छेद की समाप्ति पर फुल स्टॉप नहीं लगाया जाता।
  3. परिग्रहण संख्या (Assession Number) – यह सूची पत्रक पर बाएं हाशिये में अग्र रेखा के नीचे 4th लाइन पर दर्शाया जाता है इस अनुच्छेद की समाप्ति पर फुल स्टॉप नहीं लगाया जाता।
  4. संकेत (Tracing) – इस अनुच्छेद में प्रविष्टि के अतिरिक्त निर्मित की जाने वाली इतर प्रविष्टियों के बारे में सूचना अंकित की जाती है।यह अनुच्छेद द्वितीय उर्ध्व रेखा(second Indentation) से प्रारंभ होता है। अनुवर्ती पंक्तियां प्रथम उर्ध्व (first Indentation) रेखा से प्रारंभ होती है। सबसे पहले विषय शीर्षक(Subject Heading) को अरबी अंक 1 का प्रयोग करके उल्लेख किया जाता है। विषय शीर्षक(Subject Heading) शेयर्स लिस्ट ऑफ सब्जेक्ट हेडिंग सब्जेक्ट हेडिंग से प्राप्त किया जाता है उसके बाद रोमन अंक से स्टार्ट कर के संयुक्त लेखक का नाम तथा उसके बाद अगर  सहकारक (Collaborator ) दिया हो तो उसको लिखा जाता है उसके बाद अगले रोमन अंक से  टाइटल तथा उसके बाद अगर सीरीज (ग्रंथमाला) हुई हो तो सीरीज का उल्लेख करते हैं।

 

इतर प्रविष्टि के प्रकार एवं सरंचना (Type of entries and their Structure)AACR-2 के अनुसार निम्नलिखित प्रविष्ठियां बनाई जाती है

 

  • विषय इतर प्रविष्टि(Subject Added Entry) – इतर  प्रविष्टियों में सबसे पहले Subject Added Entry बनाई जाती है। इसके लिए विषय शीर्षक चयन की आवश्यकता होती है। विषय शीर्षक(Subject Heading) शेयर्स लिस्ट ऑफ सब्जेक्ट हेडिंग सब्जेक्ट हेडिंग(SLSH), लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस लिस्ट ऑफ सब्जेक्ट हेडिंग(LCHS) से प्राप्त किया जाता है

 

  • संयुक्त लेखक इतर प्रविष्टि(Joint Author Added Entry) – संयुक्त लेखक इतर प्रविष्टि तभी बनाई जाती है जब एक से अधिक लेखक द्वारा पुस्तक लिखी गई हो।
  • सहकारक इतर प्रविष्टि(Collaborator Added Entry) – इनको बनाने की तभी आवश्यकता होती है जब निम्नलिखित प्रविष्टि दी गई हो। सहकारक इतर प्रविष्टि में निम्नलिखित प्रविष्टि होती है।

 

 

        1. संपादक इतर प्रविष्टि (Editor Added Entry)
        2. अनुवादक इतर प्रविष्टि(Translator Added Entry)
        3. संशोधनकर्ता इतर प्रविष्टि(Reviser Added Entry)
        4. संकलन इतर प्रविष्टि(Compiler Added Entry)
        5. चित्रकार इतर प्रविष्टि(Illustrator Added Entry)

 

  • आख्या इतर प्रविष्टि(Title Added Entry) – आख्या इतर प्रविष्टि बनाने की तभी आवश्यकता होती है जब मुख्य प्रविष्टि लेखक के अंतर्गत बनी हो।
  • ग्रंथमाला इतर प्रविष्टि(Series Added Entry) – ग्रंथमाला इतर प्रविष्टि को बनाने की आवश्यकता तभी होती है जब पुस्तक किसी खास सीरीज में प्रकाशित हुआ हो।

लाइब्रेरी साइंस की हिंदी वेबसाइट

www.ouryouthgrowth.in

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